राष्ट्रीय लोक अदालत में 77728 मामलों का निपटारा, 45 करोड़ रुपये से अधिक के अवार्ड पारित

by Sandeep Verma
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जालंधर : जिला एवं सत्र न्यायाधीश जालंधर निरभऊ सिंह गिल के नेतृत्व में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसमें 77728 मामलों का निपटारा कर 455081045/-(45 करोड़ 50 लाख 81 हजार 045/-) के अवॉर्ड पारित किए गए।लोक अदालत में राजीनामा योग्य आपराधिक मामले, चेक बाउंस मामले, बैंक रिकवरी मामले, वैवाहिक विवाद, यातायात चालान, मोटर दुर्घटना दावा मामले, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण मामले, बिजली व पानी के बिल, राजस्व विभाग से संबंधित तथा सभी प्रकार के सिविल मामले निपटाने के लिए रखे गए।इस राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए जालंधर, नकोदर और फिल्लौर की अदालतों में 25 बेंचों का गठन किया गया था, जिनकी अध्यक्षता अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय, सिविल जज सीनियर डिवीजन, सिविल जज जूनियर डिवीजन, जगदीप सिंह मरौक, अध्यक्ष स्थायी लोक अदालत (सार्वजनिक उपयोगिता सेवाएं), दलजीत सिंह रल्हन, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, औद्योगिक न्यायाधिकरण जालंधर और तहसीलदार-द्वितीय जालंधर द्वारा की गई। इन लोक अदालतों में वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सदस्य के रूप में भाग लिया।
जिला एवं उपमंडल की सभी अदालतों ने विभिन्न पक्षकारों की सहमति से सुलह-समझौते के लिए मामले राष्ट्रीय लोक अदालत में रखे और उनका निपटारा करवाया। इस राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश निरभऊ सिंह गिल ने समय-समय पर विभिन्न बैठकें आयोजित कर सभी न्यायाधीशों को राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों का निपटारा करने के लिए प्रोत्साहित किया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बैंकों, बिजली विभाग, श्रम विभाग, बीमा कंपनियों सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों को इस राष्ट्रीय लोक अदालत के बारे में जानकारी दी तथा उन्हें जागरूक किया कि जो भी मामले आपसी समझौते के आधार पर निपट सकते हैं, उन्हें इस राष्ट्रीय लोक अदालत में दायर किया जाए।जिला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी जालंधर के सचिव राहुल कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 78713 मामले निपटारे के लिए रखे गए थे, जिनमें से 77728 मामलों का निपटारा किया गया और कुल 455081045/-(45 करोड़ 50 लाख 81 हजार 045/-) के प्रस्ताव पारित किए गए। उन्होंने बताया कि इस लोक अदालत में आपसी मतभेद के कारण अलग-अलग रह रहे विवाहित दम्पतियों के मामलों की भी सुनवाई की गई। लोक अदालत पीठ के प्रयासों से दम्पति पुनः साथ रहने के लिए राजी हो गए तथा एक साथ न्यायालय से अपने घर गए। उन्होंने यह भी बताया कि अगली लोक अदालत 13.09.2025 को आयोजित की जाएगी।

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