मेरे सुंदर “जालंधर महानगर” को किसकी लगी नज़र

by Sandeep Verma
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मेरा शहर जालंधर शहर जो कभी कई चीजों के कारोबार में जाना जाता था, आज मेरा महानगर जलभराव, टूटी सड़कों और जिला प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक बन चुका है। चंद दिनों की बरसात की बूंदें क्या गिरीं, पूरा महानगर तालाब बन गया।सभी महानगर के नालों की सफाई समय पर नहीं हुई, सीवरेज व्यवस्था चरमराई और नतीजा यह कि गलियों , मोहल्ला,मार्केट,बेसमेंट व लोगों के घरों में पानी घुस आया।महानगर की कई ऐसी सड़कों पर गड्ढे पहले से थे, अब बस पानी भर गया तो किश्ती चलाने वाली हो गई। गली-मोहल्लों में लोगों के घरों के अंदर तक पानी घुस आया है। महानगर के नगर निगम मुख्य कार्यालय में लिखा है कि मेरा शहर विकास कर रहा है। और महानगर के नेताओं के भाषणों में सुनता हूँ कि मेरा शहर स्मार्ट बन रहा है। लेकिन जब बाहर रोड पर चल कर देखता हूँ तो पाता चलता है कि स्मार्ट सिर्फ. फोटोशूट में है आप को बता दें कि महानगर में तो हर ओर पानी ही पानी है। जनता परेशान है, बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, दुकानदार के काम ठप पड़े किसान भाइयों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। बल्कि विकास की चमक-दमक सिर्फ. महानगर में लगे हुए बड़े बड़े पोस्टरों पर है, जमीनी हकीकत में तो हर ओर बदहाली है।मेरे साथ-साथ जनता भी पूछ रही है, आखिर हमारे शहर को किसकी नजर लगी? यह नजर आसमान से बरसी बारिश की है या फिर ज़िम्मेदारों की लापरवाही की ? हर बार आश्वासन और खोखले वादे मिलते हैं, लेकिन जालंधर की तकदीर बदलने की कोई ठोस योजना नजर नहीं आती।

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