चेतना प्रोजैक्ट : कौशल, सुरक्षा और विश्वास से भरे भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहे जालंधर के विद्यार्थी

by Sandeep Verma
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जालंधर : चेतना प्रोजैक्ट, जालंधर जिला प्रशासन की विद्यार्थियों को आवश्यक, व्यावहारिक और भविष्य के लिए तैयार (फ्यूचर रेडी) जीवन कौशल से लैस करने की महत्वपूर्ण जिला-व्यापी पहल है, जो 28 नवंबर को ‘चेतना कनफ्लुऐंस: स्किल ते सर्वाइवल’ के सफल समापन के साथ एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुई।17 अक्तूबर को शुरू किए गए प्रोजेक्ट चेतना ने 70 से अधिक स्कूलों तक तेज़ी से विस्तार किया, जिसमें 15,000 से ज़्यादा विद्यार्थियों को कवर करते हुए संरचित योजना, डिजिटल निगरानी, मानक प्रशिक्षण मॉड्यूल और ‘से-डू-आस्क’ (Say–Do–Ask) पद्धति के माध्यम से कक्षाओं में बदलाव लाया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट 6 प्रमुख विषयों पर केंद्रित है – डिजिटल साक्षरता, वित्तीय जागरूकता, लिंग संवेदनशीलता, स्वच्छता एवं सफाई, फर्स्ट एड तथा इमरजेंसी रिस्पॉन्स और करियर गाइडेंस।डिप्टी कमिश्नर जालंधर डा. हिमांशु अग्रवाल आई.ए.एस. के नेतृत्व में और सहायक कमिश्नर मुकिलन आई.ए.एस के नेतृत्व में इस प्रोजैक्ट को ज़मीनी स्तर पर लागू करने का कार्य कृतिका सेतिया कर रही है। तीन चरणों में शिक्षक प्रशिक्षण, डेमो और जिला कार्यालयों के व्यापक दौरे के साथ इस पहल ने पारदर्शिता, वास्तविक दुनिया की शिक्षा और जन भागीदारी को अपने मूल में शामिल कर लिया है।कोर्स वास्तविक दुनिया की योग्यताओं को प्राथमिकता देता है – जीवन रक्षक प्राथमिक चिकित्सा से लेकर डिजिटल और वित्तीय साक्षरता तक – यह सुनिश्चित करता है कि विद्यार्थी कक्षा के बाहर भी महत्वपूर्ण कौशल सीखें।इस प्रोजेक्ट में 6 मुख्य विषय शामिल है: डिजिटल साक्षरता, वित्तीय जागरूकता, लिंग संवेदनशीलता, स्वच्छता एवं सफाई, फर्स्ट एड तथा इमरजेंसी रिस्पॉन्स और करियर गाइडेंस। हर शुक्रवार, भाग लेने वाले स्कूलों के शिक्षक चेतना सैशन आयोजित करते है।डेमो और व्यावहारिक प्रशिक्षण सहित प्रोजैक्ट ने एक्सपोज़र विज़िट के ज़रिए जन भागीदारी को भी मज़बूत किया है, जिसके कारण विद्यार्थियों को जिला अधिकारियों से बातचीत करने और प्रशासन की कार्यप्रणाली को नज़दीक से देखने-समझने का अवसर मिला। प्रोजेक्ट ने पारदर्शिता, विश्वास और नागरिक जागरूकता को प्रोत्साहित किया है।इस पहल ने विद्यार्थियों के जीवन में बदलाव लाना शुरू कर दिया है। कई विद्यार्थी अब पूरे आत्मविश्वास के साथ बैंक डिपॉजिट स्लिप और चेक भर रहे है, जो पहले उन्हें मुश्किल लगता था। कुछ ने बताया कि वह अब क्रेप बैंडेज और साधारण पट्टी में अंतर कर सकते है, जिससे छोटी-मोटी चोटों के दौरान वे अपने परिवार के सदस्यों की मदद कर सकते हैं।विद्यार्थियों ने डिजिटल साक्षरता मॉड्यूल के प्रभाव की भी सराहना की। सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल संतोखपुरा की मुस्कान और भावेश, जिन्होंने प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की, ने बताया कि ये सत्र कितने उपयोगी रहे। उन्होंने कहा, “साइबर सिक्योरिटी वीडियो ने हमें साइबर अपराधियों के बारे में जागरूक किया। सत्रों ने हमें पासवर्ड गोपनीय रखना और ऑनलाइन सुरक्षित रहना सिखाया।” शिक्षकों ने भी विषयों को जानकारी से भरपूर, उपयुक्त और आवश्यक बताया।28 नवंबर 2025 को समापन समारोह में पूरे जिले के विद्यार्थी एकत्र हुए, जो प्रोजेक्ट चेतना के व्यापक प्रभाव को दर्शाता है। डिप्टी कमिश्नर डा. हिमांशु अग्रवाल ने सहायक कमिश्नर मुकिलन सहित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्हें कक्षा से परे भी सीखने के लिए प्रेरित किया। डिप्टी कमिश्नर ने उनसे अपील की कि इन कौशलों को वे अपने घर ले जाएं, माता-पिता और बुजुर्गों को सिखाएं और उन्हें सुरक्षित तथा सूचित रहने में मदद करें। उन्होंने विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और तैयारी की प्रशंसा की और कहा कि वित्तीय साक्षरता, डिजिटल सुरक्षा और प्राथमिक सहायता जैसे कौशल केवल अकादमिक नहीं, बल्कि जीवन कौशल हैं जिनकी हर परिवार को ज़रूरत होती है। विद्यार्थियों ने सभी 6 विषयों में मज़बूत क्षमता का प्रदर्शन किया, जिसमें सीपीआर रिले दौड़ इमरजेंसी तैयारी के एक शक्तिशाली प्रदर्शन के रूप में उभर कर सामने आई।चेतना महज़ एक प्रोजेक्ट नहीं है, यह जालंधर जिला प्रशासन की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है जो हर बच्चे को सिर्फ़ शिक्षा के लिए नहीं, बल्कि जीवन के लिए ज़रूरी कौशल, जागरूकता और आत्मविश्वास से सशक्त बनाने के लिए दृढ़ है।

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