
जालंधर : पूर्व शिक्षा मंत्री और विधायक परगट सिंह ने आरोप लगाया कि पंजाब में सरप्लस के दावे करने वाली आम आदमी पार्टी की सरकार ने राज्य को बिजली संकट में धकेल दिया है। खुद मुख्यमंत्री विदेशी दौरे करने में व्यस्त हैं, उनके मंत्रियों का ध्यान ऐश परस्ती करने और सरकारी जमीनें बेचने पर लगा है। यही कारण है कि पंजाब में बिजली की मांग और सप्लाई में करीब 1500 मेगावाट का अंतर पैदा हो चुका है। जिससे बढ़ती गर्मी के साथ बिजली कट और ज्यादा बढ़ेंगे। किसानों का भी बिजली सप्लाई न के बराबर है। परगट सिंह का कहना है कि पंजाब में बिजली के हालात इतने ज्यादा बिगड़ने लगे हैं कि अप्रैल 2026 के तीसरे हफ्ते में भीषण गर्मी और हीटवेव के अलर्ट के बीच पंजाब के शहरों और गांवों में 8 से 10 घंटे के अनियोजित पावर कट लगाने शुरू कर दिए हैं। लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, बठिंडा और पटियाला में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर हो चुकी है। अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले समय में रात के समय भी लंबे कट झेलने पड़ सकते हैं। पंजाब बिजली निगम बिजली की कमी को पूरा करने में नाकाम साबित हो रही है।उन्होंने कहा कि बीते एक सप्ताह से पंजाब में बिजली की मांग 6500 मेगावाट से एक दम 10,000 मेगावॉट के पार हो चुकी है। इस समय कृषि सेक्टर को कोई बिजली नहीं दी जा रही है, बावजूद इसके पावरकॉम पंजाब में बिजली की मांग को पूरा नहीं कर पा रहा है। अपनी किसी बड़ी गलती को छिपाने के लिए जानबूझकर ब्यूटीफिकेशन के नाम पर अघोषित बिजली कट लगाए जा रहे हैं। हेल्प लाइन नंबरों के जरिए भी उपभोक्ताओं को सही जानकारी नहीं दी जा रही है।परगट सिंह ने कहा कि पावरकॉम के कुछ सीनियर अधिकारियों का खुद कहना है कि 28 अप्रैल 2026 से पहले बिजली की मांग अनुसार आपूर्ति करना संभव नहीं है। क्योंकि पंजाब में धान की रोपाई शुरू होते ही बिजली की सप्लाई खेतीबाड़ी के लिए देनी शुरू की जाएगी, तो उस दौरान मांग और आपूर्ति में बढ़ने वाले अंतर को पावरकॉम किसी कीमत पर पूरा नहीं कर सकेगा। उन्होंने कहा कि यह तय है कि इस साल गर्मी में लोगों को बिजली के बिना बेहाल होना पड़ेगा।उन्होंने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि पंजाब में अब बिजली कट नहीं लगेंगे, बिजली सरप्लस हो चुकी है। लेकिन उनके दावे खोखले साबित हुए। सरकार पावरकॉम का घाटा पूरा नहीं कर पा रही है। यहां तक सरकार ने पंजाब में कोयले की अपनी माइन खरीदने का खूब प्रचार किया था। अब न तो माइन दिखाई दे रही है और न ही कोयला। सच यह है कि इस भीषण गर्मी में सरकार लोगों को बिजली कटों से निजात दिलाने में बुरी तरह असफल साबित हो रही है।