
भ्रष्टाचार और बिचौलियों की दखलअंदाजी को जड़ से खत्म करने के लिए डिप्टी कमिश्नर द्वारा आदेश जारी
जालंधर : डिप्टी कमिश्नर वरजीत वालिया ने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा राज्य के नागरिकों को पारदर्शी, भ्रष्टाचार मुक्त और आसान प्रशासन उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से ‘साफ-सुथरा प्रशासन’ के नारे के तहत सभी अहम सेवाओं को ऑनलाइन प्रणाली से जोड़ा गया है।
उन्होंने बताया कि इसी कड़ी में गैर-निवासी भारतीयों (एन.आर.आईज़.) और ओवरसीज़ सिटीज़न्स ऑफ इंडिया (ओ.सी.आईज़.) द्वारा भेजी गई पावर ऑफ अटॉर्नी (जी.पी.ए./एस.पी.ए.) की एम्बॉसिंग (Embossing) की प्रक्रिया को भी पूरी तरह ‘सर्विस प्लस पोर्टल’ (https://eservices.punjab.gov.in/) के माध्यम से ऑनलाइन कर दिया गया है।
वालिया ने बताया कि सरकार द्वारा इन सेवाओं के लिए फीस का स्पष्ट विवरण निर्धारित किया गया है। जी.पी.ए. के लिए 2,000 रुपये, एस.पी.ए. के लिए 1,000 रुपये और दस्तावेज रद्द करने के लिए 1,600 रुपये फीस तय की गई है। यह फीस केवल ऑनलाइन तरीके से ही भरी जा सकती है और किसी भी सरकारी दफ्तर में कोई नकद भुगतान स्वीकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन के ध्यान में आया है कि विदेशों में रह रहे कार्यकारी (एक्जीक्यूटिव्स) और जालंधर स्थित उनके अधिकृत अटॉर्नी, इस सरल ऑनलाइन विधि के बारे में पूरी जानकारी न होने के कारण अक्सर बिचौलियों, एजेंटों और दलालों का शिकार हो रहे है। यह गैर-कानूनी तत्व आवेदकों को बिना किसी परेशानी के काम करवा देने का झूठा आश्वासन देकर उनसे मोटी रकम वसूल रहे है, जो सरकार द्वारा स्थापित पारदर्शी प्रणाली का सीधा उल्लंघन है।
वालिया ने कहा कि इस प्रणाली को इतना आसान बनाया गया है कि कोई भी व्यक्ति मूल दस्तावेजों की पीडीएफ फाइल अपलोड करके, निर्धारित फीस भरकर और अपनी सुविधा अनुसार अपॉइंटमेंट बुक करके अपना काम खुद करवा सकता है।
बिचौलियों की इस दखलअंदाजी को जड़ से खत्म करने और जनता की लूट को रोकने के लिए डिप्टी कमिश्नर द्वारा आदेश जारी किए गए है कि कोई भी दफ्तरी कर्मचारी या अधिकारी बिना ऑनलाइन प्रक्रिया के किसी भी दस्तावेज पर विचार नहीं करेगा।
उन्होंने एस.एस.पी. (विजीलेंस) को बिचौलियों और दलालों के गैर-कानूनी गठजोड़ पर नजर रखने और किसी भी तरह के भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर तुरंत फौजदारी कार्रवाई अमल में लाने के लिए भी कहा।
डिप्टी कमिश्नर ने जिला नाजर को हिदायत करते हुए कहा कि जिला प्रशासकीय कॉम्प्लेक्स के अंदर काम करने वाले सभी बूथ संचालकों और टाइपिस्टों को लिखित हिदायत दी जाए कि वे ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए केवल नाममात्र की फीस ही ले सकते है। यदि कोई संचालक निर्धारित फीस से अधिक वसूली करता है या जनता को गुमराह करता पाया गया, तो उसके विरुद्ध तुरंत सख्त कार्रवाई की जाएगी।