भ्रष्टाचार व केजरीवाल की तानाशाही से आम आदमी पार्टी का अस्तित्व खतरे में : श्वेत मलिक

by Sandeep Verma
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जालंधर में पूर्व सांसद व पूर्व पंजाब भाजपा अध्यक्ष श्वेत मलिक ने प्रेस वार्ता की संबोधित किया जिसकी अध्यक्षता जिला भाजपा अध्यक्ष श्री सुशील शर्मा ने की l उस अवसर पर भाजपा वरिष्ठ नेता श्री राकेश राठौर ,श्री के डी भंडारी , रमन पब्बी,कर्मजीत कौर चौधरी,अशोक सरीन हिक्की,राजेश कपूर व अमरजीत सिंह गोल्डी जिला सचिव एवं मीडिया इंचार्ज अमित भाटिया उपस्थित थे l मलिक ने कहा कि आम आदमी पार्टी से दुखी हो कर भाजपा में आये सांसदों को गद्दार जैसा असंसदीय अपशब्द कहने पर आप पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल से स्पष्टीकरण मांगा की क्याअन्य पार्टियो से आम आदमी पार्टी में आये मुख्यमंत्री भगवंत मान व पंजाब आप पार्टी अध्यक्ष व मंत्री अमन अरोड़ा भी गद्दार है ?मलिक ने बताया की आप पार्टी के भीतर जो बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ है, जिसे पार्टी में भारी टूट के रूप में देखा जा रहा है ,इसका मुख्य कारण कथित आप पार्टी में भ्रष्टाचार और पार्टी के भीतर अरविंद केजरीवाल की तानाशाही के विरुद्ध असंतोष है। मलिक ने बताया कि पिछले दिनों सांसदों का इस्तीफा राघव चड्ढा, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, और स्वाति मालीवाल समेत आप पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और भाजपा में शामिल होने की घोषणा की है।इन सांसदों ने आप पार्टी में फैले भ्रष्टाचार के आरोप लगाए l इससे पहले केजरीवाल की भ्रष्टाचार विरोधी वादाखिलाफ़ी वतानाशाही कार्यशैली से दुखी होकर अन्ना हजारे जी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी व कहा है कि जो पार्टी भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से बनी थी, वह अब खुद भ्रष्टाचार का अड्डा बन गई है। मलिक ने अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगाया है कि उन्होंने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के अगुआ अन्ना हजारे जैसे संत का विश्वास तोड़ा है और उनके भ्रष्टाचार विरोधी आदर्शों को त्याग दिया है l इसी कारण पिछले समय अरविंद केजरीवाल के दोहरे चरित्र से निराश हो कर आम आदमी पार्टी के फाउंडर सदस्य प्रशांत भूषण , कुमार विश्वास ,योगेंद्र यादव , किरण बेदी,शाजिया इल्मी,धर्मवीर गांधी , हरविंदर खालसा , सूचा सिंह छोटेपुर , गुरप्रीत घुगी , अलका लांबा व कई बड़े नेता आप पार्टी छोड़ कर चले गए l सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कहा, संविधान में किसी भी पार्टी का नाम नहीं लिखा है ,लोकतंत्र में लोग पूरी तरह से आज़ाद होते हैं; अगर किसी का मन कहीं और जाने का करता है, तो वह ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है अगर आप पार्टी ठीक से काम करतीं और सिद्धांत ना तोड़ती वअपने अंदरूनी अनुशासन को बनाए रखतीं, तो उनका पतन ना होता । मालिक ने कहा यह आप पार्टी के भीतर सत्ता, संसाधनों पर नियंत्रण और वैचारिक मतभेदों की लड़ाई है, न कि केवल वैचारिक मतभेद।मलिक ने कहा कि आप पार्टी नेता सिसोदिया ने नेताओ कीबैठक जिसमे मुख्यमंत्री भगवंत मान व पार्टी अध्यक्ष अमन अरोड़ा की उपस्थिति में खुल कर कहा कि पंजाब में चुनाव जीतने के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव जीतने के लिए साम, दाम, दंड, भेद और यहाँ तक कि “लड़ाई-झगड़ा” करने जैसी नीतियां अपना सत्ता हासिल करने को कहा जो आप पार्टी के दुष्चरित्र की पोल खोलता है l भविष्य पर संकट 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में भाजपा के हाथों करारी हार जब केजरीवाल वि सिसोदिया भी चुनाव हार गए और अब राज्यसभा में इस टूट के बाद, आम आदमी पार्टी के अस्तित्व बचने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जो पार्टी संगठन और सरकार में पारदर्शिता की बात करती थी, नीति निर्धारण में जन सहभागिता की बात करती थी, आलाकमान कल्चर का विरोध करती थी, हर स्तर पर लोकतंत्र की वकालत करती थी, वह पार्टी एक तानाशाह प्रवृत्ति का आदमी अरविंद केजरीवाल में सिमट कर रह गयी ,उससे असहमति का अर्थ किसी के भविष्य का सर्वनाश.. पार्टी में केजरीवाल के अलावा सब रोबोट हो गये. जिनमें जितना केजरीवाल का सॉफ्टवेयर डाला जाये, बस उतना ही काम करे और आगे के काम के लिये केजरीवाल द्वारा सॉफ्टवेयर अपडेट का इंतजार किया जाये. पार्टी में लोकतंत्र की हत्या हो गई और तो स्वार्थी लोगों का जमावड़ा होने लगा. इनको समझ में आ गया कि नेता की परिक्रमा करो, विधायक, सांसद और मंत्री बनो. आप पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन हो रहा है और पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है। उन्होंने कहा कि पार्टी के कई नेता अब खुद को असहज महसूस कर रहे हैं, जिसके चलते वे अन्य विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।
मलिक ने यह भी कहा कि बीजेपी हमेशा उन नेताओं का स्वागत करती है जो राष्ट्रहित में काम करना चाहते हैं और पारदर्शिता तथा सुशासन में विश्वास रखते हैं।

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