करवा चौथ पर मिट्टी के मटके से जल अर्पित करने का है विशेष महत्व : जाने

Offering water from an earthen pot on Karva Chauth has special significance: Learn more

by Sandeep Verma
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करवा चौथ पर मिट्टी के मटके से जल अर्पित करने का विशेष महत्व  है इससे जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई है
पंचतत्व का प्रतीक: मिट्टी का करवा [पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश] इन पांच तत्वों से मिलकर बना होता है, जो जीवन और संतुलन का प्रतीक है।
चंद्रमा को अर्घ्य: करवा चौथ की शाम को मिट्टी के करवे में शुद्ध जल, अक्षत (चावल), रोली और हल्दी डालकर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है।

सुख और समृद्धि: पुराणों और मान्यताओं के अनुसार, करवे में भरा जल और सामग्री परिवार में सुख-शांति और पति की लंबी उम्र की कामना के लिए समर्पित होती है।

व्रत खोलना और परंपरा

पति के हाथों जलपान: चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद, महिलाएं छलनी से चांद और फिर पति का चेहरा देखकर पति के हाथों से इसी करवे का जल पीकर अपना निर्जला व्रत खोलती हैं।

बच्चों को जल देना: कई जगहों पर व्रत के बाद करवे के बचे हुए पवित्र जल को बच्चों को पिलाया जाता है, जिससे उनकी सेहत और लंबी उम्र की मान्यता जुड़ी होती है।

पूजा के बाद करवे का क्या करें?

विसर्जन या संभालना : पूजा के बाद मिट्टी के करवे को इधर-उधर नहीं फेंकना चाहिए। इसे आप किसी पवित्र नदी या तालाब में विसर्जित कर सकते हैं, या फिर किसी पौधे (जैसे तुलसी) के पास रख सकते हैं।

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