


जालंधर : जालंधर के खेल और लेदर उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने सोमवार को एमएसएमई-टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर (पीपीडीसी), मेरठ के साथ जालंधर में एक एक्सटेंशन सेंटर खोलने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।खेल सामग्री विनिर्माण पर आयोजित हितधारकों की बैठक को संबोधित करते हुए पंजाब के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा, “यह एक ऐतिहासिक दिन है क्योंकि राज्य सरकार के अथक प्रयासों के चलते यह केंद्र यहां स्थापित किया जा रहा है, जो अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) को सुनिश्चित कर खेल उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन देगा।”पंजाब के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री ने कहा कि यह पहल शहर के विश्व प्रसिद्ध खेल सामग्री विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि आज प्रोसेस कम प्रोडक्ट डेवलपमेंट सेंटर (पीपीडीसी), मेरठ और गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ लेदर एंड फुटवियर टेक्नोलॉजी (गिल्फ्ट), जालंधर के बीच शहर में एक विशेष टेक्नोलॉजी एक्सटेंशन सेंटर स्थापित करने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह समझौता पीपीडीसी मेरठ के प्रिंसिपल डायरेक्टर और गिल्फ्ट जालंधर के प्रिंसिपल रोहित दहिया द्वारा औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित किया गया।उद्योग मंत्री ने इस पहल को “गेम-चेंजर” बताते हुए कहा कि इससे जालंधर का खेल उद्योग दुनिया के अग्रणी विनिर्माण केंद्रों में शामिल होगा। उन्होंने कहा, “लगभग ₹10 करोड़ की लागत से स्थापित होने वाला यह टेक्नोलॉजी एक्सटेंशन सेंटर परीक्षण, प्रशिक्षण, कौशल विकास और अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान करेगा, जिससे वैश्विक मानकों को पूरा किया जा सके। पंजाब देश के खेल सामग्री उत्पादन में लगभग 65 प्रतिशत और निर्यात में करीब 70 प्रतिशत योगदान देता है।”मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा कि अकेले जालंधर में 1,000 से अधिक विनिर्माण इकाइयां हैं और यहां से खेल उपकरण 150 से अधिक अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात किए जाते हैं। उन्होंने कहा, “नया केंद्र तेजी से बढ़ते वैश्विक बाजार में स्थानीय उद्योग को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मदद करेगा। वर्ष 2024 में अंतरराष्ट्रीय खेल उपकरण बाजार का मूल्य लगभग 180 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो 2030 तक 6.8 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ने का अनुमान है।”मंत्री ने कहा कि भारत की खेल अर्थव्यवस्था 2030 तक 80–90 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है और इस विकास यात्रा में पंजाब की भूमिका निर्णायक बनी रहेगी। उन्होंने कहा, “यह टेक्नोलॉजी एक्सटेंशन सेंटर खेल और लेदर उद्योग की विशिष्ट आवश्यकताओं को समझने तथा आधुनिक तकनीक, ऑटोमेशन और सतत विनिर्माण के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार करने पर केंद्रित होगा। पंजाब सरकार ने इस परियोजना के लिए भूमि पहले ही उपलब्ध करा दी है, जो मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में औद्योगिक विकास के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”मंत्री संजीव अरोड़ा ने जमीनी स्तर पर घरेलू उत्पादन को मजबूत करने के लिए पंजाब सरकार द्वारा शुरू की जा रही कई पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संबंधित उद्योगों के हितधारकों से व्यापक परामर्श के बाद कई अहम सुधार लागू किए गए हैं। उन्होंने इस ऐतिहासिक आयोजन में उपस्थित सभी लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि यह राज्य के खेल उद्योग को एक बड़ा प्रोत्साहन देगा।कैबिनेट मंत्री ने कहा कि जालंधर खेल उद्योग का केंद्र है और यहां निर्मित उत्पादों को पूरी दुनिया में सराहा जाता है। उन्होंने कहा, “आज का यह आयोजन नीति आयोग और भारत सरकार का संयुक्त प्रयास है, जिसका उद्देश्य राज्य के खेल उद्योग को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है।”मंत्री संजीव अरोड़ा ने आशा व्यक्त की कि खेल सामग्री विनिर्माण पर आयोजित यह हितधारक बैठक एक नई सफलता गाथा लिखने में सहायक सिद्ध होगी।उन्होंने कहा कि पंजाब खेल उपकरण विनिर्माण के क्षेत्र में भारत का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है और अपने लंबे समय से विकसित इकोसिस्टम के चलते न केवल घरेलू मांग बल्कि बड़े पैमाने पर निर्यात के जरिए वैश्विक बाजार की भी जरूरतें पूरी कर रहा है।
उन्होंने कहा कि कुशल मानव संसाधन, क्लस्टर आधारित विनिर्माण और मजबूत नीतिगत समर्थन के कारण पंजाब देश के कुल उत्पादन और निर्यात में बड़ा योगदान देता है।मंत्री ने कहा कि पंजाब में यह क्षेत्र पारंपरिक शिल्प से विकसित होकर एक संगठित, निर्यात-उन्मुख विनिर्माण केंद्र बन चुका है, जो अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों, खेल महासंघों और संस्थागत खरीदारों की आवश्यकताओं को पूरा करता है। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र प्रत्यक्ष रूप से 1.5 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देता है, जबकि लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग और अन्य सेवाओं के माध्यम से 3 लाख से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है।उन्होंने कहा कि पंजाब का प्रमुख विनिर्माण केंद्र जालंधर में स्थित है, जहां 1,000 से अधिक इकाइयां कार्यरत हैं और इसे भारत में खेल सामग्री के उत्पादन एवं निर्यात का प्रमुख केंद्र माना जाता है। उन्होंने कहा कि जालंधर का क्लस्टर हाथ से सिले फुटबॉल, क्रिकेट उपकरण, सुरक्षा खेल सामग्री और फिटनेस उत्पादों के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है। पंजाब के निर्माता एडिडास, नाइकी, प्यूमा, डिकैथलॉन और न्यू बैलेंस जैसे वैश्विक ब्रांडों को भी आपूर्ति करते हैं, जिससे पंजाब एक भरोसेमंद वैश्विक सोर्सिंग बेस के रूप में स्थापित हुआ है।मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा कि खेल सामग्री विनिर्माण में पंजाब की प्रतिस्पर्धात्मकता का आधार उसकी रणनीतिक स्थिति, कुशल कार्यबल और निवेशक-अनुकूल वातावरण है। दिल्ली एनसीआर से निकटता, सुदृढ़ सड़क एवं रेल संपर्क, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों तक पहुंच और एकीकृत लॉजिस्टिक्स ढांचा प्रभावी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती देता है।उन्होंने कहा कि पंजाब तकनीकी उन्नयन, ऑटोमेशन, मानकीकृत विनिर्माण और निर्यात विस्तार पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रहा है। घरेलू मांग में निरंतर वृद्धि, बढ़ते निर्यात और बदलती वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ पंजाब भारत में खेल उपकरण विनिर्माण का अग्रणी केंद्र बना हुआ है। खेल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए पंजाब सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी।खेल सामग्री विनिर्माण पर आयोजित हितधारकों की बैठक को संबोधित करते हुए श्री अरोड़ा ने कहा कि उन्होंने जुलाई 2025 में केंद्रीय एमएसएमई मंत्री से मुलाकात कर मेरठ की तर्ज पर इस टेक्नोलॉजी एक्सटेंशन सेंटर की मांग की थी, जिसके सकारात्मक परिणाम दिसंबर 2025 में सामने आए, जब भारत सरकार ने जालंधर जिले के लिए इस अत्याधुनिक केंद्र को स्वीकृति प्रदान की।इस अवसर पर पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा, नीति आयोग के वाइस चेयरमैन सुमन बेरी, नीति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार संजीत सिंह और उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रशासनिक सचिव कमल किशोर यादव ने भी खेल सामग्री विनिर्माण में तकनीकी उन्नयन और नवाचार के महत्व पर प्रकाश डाला।पंजाब के बागवानी एवं रक्षा सेवाएं कल्याण मंत्री मोहिंदर भगत ने नीति आयोग और पंजाब सरकार का धन्यवाद करते हुए इसे जालंधर जिले के लिए नववर्ष का उपहार बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल वैश्विक प्रतिस्पर्धा से निपटने की शहर की क्षमता को काफी मजबूत करेगी। उन्होंने जालंधर के खेल उद्योग को पंजाब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया और कहा कि इस उद्योग ने राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने में अहम भूमिका निभाई है।मंत्री ने कहा कि खेल सामग्री क्षेत्र ने युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित किए हैं और जालंधर को वैश्विक विनिर्माण मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाई है। उन्होंने विश्वास जताया कि निरंतर संस्थागत सहयोग और नीतिगत समर्थन से यह उद्योग नई ऊंचाइयों को छुएगा और पंजाब के आर्थिक विकास एवं रोजगार सृजन में और योगदान देगा।टेक्नोलॉजी एक्सटेंशन सेंटर की स्थापना पर जालंधर के खेल उद्योग को बधाई देते हुए नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने स्थानीय निर्माताओं से गुणवत्ता और नवाचार में निवेश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में निरंतर निवेश से वैश्विक ब्रांड तैयार करने का मार्ग प्रशस्त होगा।दिन की शुरुआत में नीति आयोग की टीम ने उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा जालंधर की प्रमुख खेल सामग्री विनिर्माण इकाइयों—सावी इंटरनेशनल, अल्फा हॉकी और श्रेय स्पोर्ट्स—का दौरा किया। सावी इंटरनेशनल के मुकुल वर्मा ने टीम को जालंधर निर्मित उत्पादों के वैश्विक उपयोग की जानकारी दी, जिनमें महिला रग्बी विश्व कप में प्रयुक्त रग्बी बॉल और ओलंपिक में इस्तेमाल किए गए हॉकी उपकरण शामिल हैं।इस अवसर पर जालंधर निर्मित खेल सामग्री, सुरक्षा उपकरण और संबंधित उत्पादों की प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसे नीति निर्धारकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने सराहा।कार्यक्रम में पंजाब स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन (पीएसआईईसी) के उपाध्यक्ष दिनेश ढल, जिला योजना समिति के चेयरमैन अमृतपाल सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।बाद में, जालंधर जिला प्रशासन की ओर से उपायुक्त डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी गणमान्य व्यक्तियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।






