


जालंधर : शहर के चर्चित पास्टर अंकुर नरूला और उनकी संस्था ‘चर्च ऑफ साइन एंड वंडर्स’ के खिलाफ पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जालंधर के समाज सेवक तेजस्वी मिन्हास द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित पक्षों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। जानकारी देते हुए समाज सेवक तेजस्वी मिन्हास ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश शील नागू की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान याचिका में लगाए गए आरोपों पर प्रारंभिक विचार करते हुए सरकारों को निर्देश दिया कि वे निर्धारित समय के भीतर अपना पक्ष स्पष्ट करें। याचिकाकर्ता के वकील विशाल गर्ग नरवाना ने अदालत में दलील दी कि पास्टर अंकुर नरूला और उनकी पत्नी सोनिया नरूला ‘अभिषेक तेल’ और कथित चमत्कारी उपचार के नाम पर गरीब और भोले-भाले लोगों को गुमराह कर रहे हैं।याचिका में आरोप लगाया गया है कि संस्था चमत्कारिक इलाज का दावा कर लोगों को प्रभावित करती है और इसके जरिए धर्म परिवर्तन को बढ़ावा दिया जाता है। अदालत को बताया गया कि यह गतिविधियां Drugs and Magic Remedies Act, 1954 का उल्लंघन हैं। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे यूट्यूब और फेसबुक के माध्यम से इन तथाकथित चमत्कारों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को प्रभावित किया जा सके।याचिका में एक और गंभीर आरोप विदेशी कनेक्शन को लेकर लगाया गया है। दावा किया गया कि अंकुर नरूला की कार्यप्रणाली नाइजीरिया के विवादित प्रचारक T. B. Joshua से प्रेरित है। आरोप है कि विदेशी मिशनरियों को ‘टूरिस्ट वीजा’ पर भारत बुलाकर उनसे धार्मिक गतिविधियां करवाई जा रही हैं, जो Foreigners Act, 1946 का उल्लंघन हो सकता है।संस्था की फंडिंग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिका के अनुसार संस्था को विदेशी चंदा (FCRA) नियमों के तहत वैध पंजीकरण के बिना प्राप्त हो रहा है। चर्च परिसर में घड़ियों और ‘अभिषेक तेल’ की बिक्री बिना जीएसटी बिल के किए जाने का भी आरोप लगाया गया है, जिससे टैक्स चोरी की आशंका जताई गई है।प्रशासनिक स्तर पर 12 जनवरी को शिकायत देने के बावजूद कार्रवाई न होने पर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में खांबड़ा गांव में बने विशाल चर्च भवन के निर्माण की वैधता को भी चुनौती दी गई है अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान केंद्र और राज्य सरकारों को अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा। अदालत की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह मामला धार्मिक गतिविधियों, विदेशी फंडिंग और कानूनी अनुपालन जैसे संवेदनशील मुद्दों से जुड़ा हुआ है।

