


फिल्लौर (जालंधर) : पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी ने आज कहा कि एस.सी./एस.टी. अत्याचार रोकू अधिनियम 1989 सामाजिक समानता और न्याय को सुनिश्चित बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण संवैधानिक उपाय है, जिसका उद्देश्य एस.सी./एस.टी. समुदाय के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करना है।यहां महाराजा रणजीत सिंह पंजाब पुलिस अकादमी में डी.एस.पी. स्तर के अधिकारियों के लिए एस.सी./एस.टी. अत्याचार रोकू अधिनियम 1989 संबंधी करवाई गई विस्तारपूर्वक प्रशिक्षण में मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत करते हुए चेयरमैन जसवीर सिंह गढ़ी ने कहा कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उदेश्य कानून के प्रभावशाली अमल के लिए पुलिस अधिकारियों को इस अधिनियम संबंधी विस्तार से जानकारी देना, संवेदनशील मामलों में अधिनियम के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित बनाना और इस अधिनियम के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।उन्होंने कहा कि पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के पास आने वाले ज्यादातर मामले पुलिस विभाग से संबंधित होते है। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों को एस.सी./एस.टी. अत्याचार रोकू अधिनियम के बारे में आज जो प्रशिक्षण मुहैया करवाया गया है, उससे ऐसे मामलों की संख्या कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि एस.सी. आयोग के सुझाव पर पुलिस विभाग द्वारा यह प्रशिक्षण पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर करवाई गई है। गढ़ी ने कहा कि इस कडी में यह पहला प्रशिक्षण प्रोग्राम किया गया है और आने वाले दिनों में पंजाब भर के 400 के करीब डी.एस.पी. को विस्तारपूर्ण शिक्षा देने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण में शामिल पंजाब भर से आए पुलिस अधिकारियों द्वारा इस शिक्षा प्रोग्राम को बढिया सर्मथन दिया गया है।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार समाज के कमजोर वर्गों के साथ-साथ प्रत्येक वर्ग के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए दृढ़ वचनबद्ध है।इस प्रशिक्षण प्रोग्राम में डी.जी.पी. पंजाब गौरव यादव और स्पैशल डी.जी.पी-कम-डायरेक्टर अनीता पुंज का विशेष योगदान रहा।विभिन्न प्रशिक्षण सैशनों के दौरान विशेषज्ञों द्वारा एस.सी./एस.टी. अत्याचार रोकू अधिनियम के विभिन्न पहलुओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

