जालंधर : ज्योतिषी आशु मल्होत्रा ने दूसरे नवरात्र मां भगवती के सरुप के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि मां का दूसरा रूप ब्रह्मच्चारिणी जी है मा का ये रूप हमें तप त्याग धैर्य और विश्वास के लिए प्रेरित करता है मा ने नारद जी के कहने पर भगवान् शिव को पति रूप मै प्रापत करने के लिए हज़ारों साल कठोर तपस्या की उन्होंने अपना जीवन बहुत ही कठिन बना लिया उन्होंने केवल फल और पते खाकर जीवन जिया और कठोर तप किया फिर उन्होंने कई साल सिर्फ बेल पत्र खाकर जीवन जिया पर ऐसा करने से उनका शरीर बहुत ही कमजोर हो गया लेकिन उन्होंने अपना तप नहीं छोड़ा फिर भगवान शंकर उनकी इस तपस्या से प्रसन हुए और मा ब्रह्मचरिणी जी को पत्नी रूप मै स्वीकार किया इस लिए मा का ये रूप हमें जीववन मै कठोर तप का धैर्य का त्याग का और अपने लक्ष्य पर अडिंग रहने का महत्व समझाता है