अपराध सुलझाने से लेकर अपराधियों पर नज़र रखने तक — पंजाब पुलिस के लिए आधुनिक हथियार बना ‘इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ (ICCC)

by Sandeep Verma
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से अपराधियों की गिरफ़्तारी, उपद्रवियों की निगरानी, ट्रैफ़िक प्रबंधन और अपराध रोकने में राज्य पुलिस को मिल रही बढ़त

जालंधर : पंजाब पुलिस द्वारा शुरू किया गया अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) देशभर में आधुनिक पुलिसिंग के नए मानक स्थापित कर रहा है। अपराधियों की गतिविधियों पर नज़र रखने से लेकर उपद्रवियों को पकड़ने तक, पंजाब पुलिस अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अपने कर्मियों की मानवीय सूझबूझ के मेल से ‘सुरक्षित पंजाब’ के लक्ष्य को और प्रभावी ढंग से हासिल कर रही है।

हाल ही में पंजाब के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) गौरव यादव ने लुधियाना में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) का उद्घाटन किया। इस परियोजना के तहत शहर के 259 स्थानों पर करीब 1,700 हाई-रेज़ोल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं, जिससे देश के ‘औद्योगिक केंद्र’ माने जाने वाले शहर की निगरानी व्यवस्था को और मज़बूत किया गया है।

जालंधर भी आईसीसीसी परियोजना की सफलता का बड़ा उदाहरण बनकर उभर रहा है। शहरभर में लगे 1,007 हाई-रेज़ोल्यूशन कैमरों वाले इस सर्विलांस नेटवर्क ने कई मामलों को सुलझाने में
महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भार्गव कैंप स्थित एक ज्वेलरी दुकान में हुई 1 करोड़ रुपये के सोने और 2 लाख रुपये नकद की सशस्त्र लूट के मामले में आईसीसीसी ने आरोपियों की गतिविधियों का पुनर्निर्माण करने में मदद की। आईसीसीसी की सहायता से पुलिस ने एक साथ 12 जंक्शन की फुटेज को सिंक्रोनाइज़ किया और शहर की गलियों से गुज़रते हुए आरोपियों के भागने के रास्ते को ट्रैक कर उनका ठिकाना खोज निकाला तथा चोरी की गई संपत्ति बरामद की।

पूर्व मंत्री और भाजपा नेता मनोरंजन कालिया के घर पर हुए ग्रेनेड हमले की जाँच में भी आईसीसीसी ने डिजिटल साक्ष्यों को जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई। जाँचकर्त्ताओं ने अपराध स्थल से जालंधर रेलवे स्टेशन तक संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों का विजुअल ट्रेल तैयार किया। बाद में एक आरोपी की पहचान फुटेज के आधार पर हुई और फरारी के दौरान किए गए 3,500 रुपये के ऑनलाइन लेन-देन के ज़रिए उसे चार राज्यों में ट्रैक करते हुए दिल्ली से गिरफ़्तार किया गया।

हाई-रिजॉल्यूशन ट्रैकिंग कैमरों ने बेहतर तालमेल स्थापित करने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। संतोखपुरा फायरिंग मामले में कुछ हमलावरों ने एक वेटरिनरी डॉक्टर के घर पर करीब 12 गोलियाँ चलाई थीं। हाई-रेज़ोल्यूशन कैमरों में एक आरोपी गोलीबारी की वीडियो बनाते हुए और दूसरा फायरिंग करते हुए कैद हुआ। आईसीसीसी और स्थानीय निजी सीसीटीवी कैमरों के समन्वय से तैयार किए गए विजुअल मार्कर्स के आधार पर आरोपियों की गतिविधियों को मुख्य निगरानी मार्गों तक ट्रेस किया गया।

जाँच के बाद दो आरोपियों को गिरफ़्तार किया गया और दो हथियार बरामद किए गए। आम आदमी पार्टी के नेता सतविंदरपाल सिंह ‘लक्की’ ओबरॉय की मॉडल टाउन में गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद, आईसीसीसी ने रिकग्निशन एनालिसिस के जरिए जाँच में सहायता प्रदान की।सीसीटीवी फुटेज में काले रंग की हूडी पहने हमलावर और उसके एक साथी को काले रंग के दुपहिया वाहन पर साफ तौर पर देखा गया। बाद में इन जानकारियों का गैंग से जुड़े डिजिटल दावों के साथ मिलान किया गया,जिसके आधार पर पुलिस रिपोर्ट में मुख्य आरोपियों के नाम सामने आए। उच्च-स्तरीय पहचान प्रणाली का उपयोग हरनामदास पुरा स्थित एक ट्रैवल शॉप में हुई वेस्टर्न यूनियन नकदी लूट की घटना की जाँच में किया गया, जहाँ कुछ नकाबपोश बदमाशों ने ₹1.08 लाख की लूट को अंजाम दिया था।नकाब पहने होने के बावजूद कैमरों ने आरोपियों के आने-जाने के रास्तों को रिकॉर्ड किया और ऑपरेटरों ने अपराध से पहले उनकी गतिविधियों को कई गलियों तक ट्रैक किया।

जालंधर में कुल 982 फिक्स्ड कैमरे लगातार निगरानी और सुरक्षा के लिए लगाए गए हैं, जबकि 15 कैमरे पैन-टिल्ट-ज़ूम तकनीक वाले हैं, जो सक्रिय ट्रैकिंग में सक्षम हैं। कुल 10 स्थानों पर ट्रांजिट हब्स में बायोमेट्रिक मिलान के लिए फेशियल रिकग्निशन सिस्टम लगाए गए हैं, जबकि 20 स्थानों पर वाई-फाई हॉटस्पॉट और अतिरिक्त सेंसर की सुविधा उपलब्ध है। आईसीसीसी ऑपरेटर ‘रेड शर्ट’, ‘व्हाइट एसयूवी’ या ‘वहिकल स्पीड’ जैसे संकेतों के आधार पर कुछ ही सेकंड में हज़ारों घंटों की फुटेज खंगाल सकते हैं।

इस संबंध में डीजीपी गौरव यादव ने कहा,IMG 20260514 WA0146पंजाब पुलिस की संगठित अपराध और गैंगस्टरों के ख़िलाफ जीरो टॉलरेंस नीति है। जहाँ एक ओर पुलिस बल ज़मीनी स्तर पर अपराधियों और गैंगस्टरों के ख़िलाफ सफल अभियान चला रहा है, वहीं राज्य के विभिन्न जिलों में स्थापित आईसीसीसी इस काम को और अधिक कुशल बनाने में सहायता कर रहा है। पंजाब पुलिस अपराध की जड़ों तक पहुँचने में सक्षम है और हालिया तकनीकी विकासों से हमारा उद्देश्य पूरी तरह स्पष्ट है।”

ऑटोमेटेड एल्गोरिद्म लगातार 1,000 से अधिक कैमरा फीड्स को स्कैन करते हैं और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करते हैं। इनमें लावारिस वस्तु की पहचान, अवैध भीड़ को पहचानने के लिए भीड़ गठन का विश्लेषण और कैमरों से छेड़छाड़ होने पर अलर्ट जारी करना शामिल है, जिससे तुरंत मैनुअल समीक्षा शुरू हो जाती है।

जालंधर के पुलिस कमिश्नर धनप्रीत रंधावा ने कहा,“आईसीसीसी शहर के ‘ब्रेन’ की तरह कार्य करता है, जो रॉ डेटा को उपयोगी खुफ़िया जानकारी में बदल देता है। ‘सिंगल पेन ऑफ ग्लास’ डैशबोर्ड के ज़रिए ट्रैफ़िक डेन्सिटी, अपराध हॉटस्पॉट और नगर निगम सेंसर डेटा को एकीकृत GIS आधारित इंटरफ़ेस में जोड़ा गया है। इससे पुलिस, ट्रैफ़िक और नगर निगम विभागों के बीच समन्वय और तेज़ हुआ है।”

उन्होंने आगे कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने पुलिसिंग को और बेहतर बनाया है, लेकिन इसका सही उपयोग सबसे महत्त्वपूर्ण है। पंजाब पुलिस आईसीसीसी का प्रभावी इस्तेमाल कर उपद्रवियों पर लगातार निगरानी बनाए रखती है। यह आर्टिफिशियल और ह्यूमन इंटेलिजेंस का बेहतरीन संयोजन है। आईसीसीसी ने ‘गैंगस्टरां ते वार’, ‘ऑपरेशन प्रहार’ जैसी कई परियोजनाओं को अतिरिक्त ताकत दी है।”

लुधियाना में हाल ही में उद्घाटित आईसीसीसी के तहत ट्रैफ़िक, पुलिस कंट्रोल रूम (PCR), सेफ सिटी और वायरलेस जैसी विभिन्न इकाइयों को एक ही छत के नीचे एकीकृत किया गया है, जिससे पुलिस कार्य में तालमेल और समन्वय काफी बढ़ा है तथा पीसीआर के प्रतिक्रिया समय को 15 मिनट से घटाकर लगभग 7–8 मिनट तक कर दिया गया है। आईसीसीसी परियोजना के तहत लुधियाना में 259 स्थानों पर 1,700 हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं, जिससे शहर की निगरानी प्रणाली को और मजबूत किया गया है। इसके साथ ही 46 विभिन्न स्थानों पर इंटेलिजेंट ट्रैफ़िक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) भी स्थापित किया गया है।

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