डीए पर पंजाब सरकार के सभी बहाने हाईकोर्ट ने किए खारिज-अशोक सरीन हिक्की

The High Court has rejected all the excuses of the Punjab government on DA: Ashok Sarin Hikki

by Sandeep Verma
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जालंधर : जालंधर शहरी जिला के जिला अध्यक्ष अशोक सरीन हिक्की ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली ‘आप’ सरकार की सरकारी कर्मचारी एवं पेंशनर विरोधी सोच को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। अदालत ने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) के बकाया को रोकने के लिए सरकार द्वारा दिए गए हर तर्क को सिरे से खारिज कर दिया।

अशोक सरीन हिक्की ने कहा कि अदालत में हारने के बाद भी पंजाब सरकार ने वही पुराने तर्क दोहराते हुए पंजाबियों को गुमराह करने की कोशिश की, जिन्हें हाईकोर्ट अपने विस्तृत फैसले में पहले ही अस्वीकार कर चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार को न्यायालय के आदेश का सम्मान करना चाहिए, न कि कर्मचारियों को भ्रमित करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकार वेतन आयोग की सिफारिशों को अपनी सुविधा के अनुसार लागू नहीं कर सकती। जब सरकार ने संशोधित वेतनमान स्वीकार किए हैं, तो उसी के अनुरूप डीए देने से पीछे नहीं हट सकती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मूल वेतन और महंगाई भत्ता अलग-अलग उद्देश्य पूरे करते हैं और दोनों की तुलना कर कर्मचारियों के अधिकारों से इनकार नहीं किया जा सकता।

वित्तीय संकट का हवाला देने वाले सरकार के तर्क को भी अदालत ने खारिज करते हुए कहा कि आर्थिक कठिनाइयों के नाम पर कर्मचारियों और पेंशनरों के कानूनी अधिकारों को नहीं रोका जा सकता। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि विज्ञापनों और अन्य अनुत्पादक खर्चों पर धन खर्च करना कर्मचारियों के वैध बकाये रोकने का आधार नहीं बन सकता।

हिक्की सरीन ने कहा कि पंजाब के लाखों कर्मचारी और पेंशनर ‘आप’ सरकार की गलत प्राथमिकताओं के शिकार बने हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार अनावश्यक कानूनी लड़ाई छोड़कर हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करे और निर्धारित समय सीमा के भीतर डीए का पूरा बकाया जारी करे।

उन्होंने कहा, “यह केवल डीए का मामला नहीं, बल्कि उस सरकार की विश्वसनीयता का प्रश्न है जिसने कर्मचारियों को सम्मान का वादा किया था, लेकिन उन्हें केवल वादाखिलाफी, अदालतों के चक्कर और आर्थिक असुरक्षा दी।”

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