


जालंधर : 15 मार्च, 1996 के बाद शनिदेव फिर से 21 जनवरी, 2026 में मीन राशि में अपने नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद में प्रवेश करने जा रहे हैं। शनिदेव का अपने नक्षत्र में संचार अहंकारियों का नाश करेगा जानकारी देते हुए ज्योतिषाचार्य आशु मल्होत्रा ने कहा है कि शनि देव जब सभी राशियों का चक्र काटते हुए मकर राशि में आते हैं तो दुनिया बदलनी शुरू हो जाती है। जैसे कि सबको याद होगा कि 2020 में शनिदेव मकर राशि में आए थे उसके बाद से लेकर अब तक दुनिया में काफी परिवर्तन आ चुके हैं। अब शनिदेव मार्च, 2025 से देव गुरु बृहस्पति की राशि मीन के है जो धर्म और कुदरत की राशि है, दंड की राशि भी है। शनि देव 25 जनवरी, 2026 को लगभग 30 वर्षों के बाद मीन राशि में अपने नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद में आ रहे हैं जिसके प्रभाव जिसे भी देश और दुनिया के अहंकारी नेता, साधु, संत, व्यापारी जो खुद को भगवान मानते हुए गरीबों पर अत्याचार किया थे, कानून का गलत इस्तेमाल किया था उन्हें शनि देव दंडित करेंगे।शनिदेव इन सबका हिसाब करेंगे क्योंकि शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव ने शनिदेव को न्याय के देवता का दर्जा दिया है जो देवी-देवताओं, राक्षसों व मानव के साथ इंसाफ करते हैं और जो लोग ईमानदारी से जीवन में मेहनत करते हुए कार्य कर रहे हैं शनिदेव उनको मालामाल करेंगे। 19 मार्च, 2026 से विक्रमी सम्वत् 2083 शुरू हो रहा है जिसमें राजा देव गुरु बृहस्पति और मंत्री मंगल बनेंगे। बृहस्पति धर्म के साथ और शनि बृहस्पति की राशि में संचार करेंगे इसलिए कई देशों में तख्ता पलट होगा और दुनिया में जंग की ज्वाला और तेज होगी। शनि जून 2027 तक मीन राशि में रहेंगे।
