समय पर कार्रवाई करती तो बच्ची बच सकती थी” — अश्वनी शर्मा का पंजाब पुलिस पर बड़ा आरोप

by Sandeep Verma
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जालंधर : परिवार ने समय पर पुलिस को सूचना दी। चार पुलिस कर्मचारी भी आए और उन्हें यह भी पता लग गया कि बच्ची उस घर के अंदर प्रवेश कर चुकी है। लेकिन एक घंटे बाद भी वे सिर्फ चार मरले के घर की ठीक तरीके से तलाश नहीं कर पाए। उल्टा, जिनकी बच्ची थी, उन्हें यह कहकर चले गए कि “हम सुबह 10 बजे आएंगे”, इससे स्पष्ट है की पंजाब पुलिस ने सतर्क रह मुसतेदी से कारवाई नहीं की अगर की होती तो शायद बच्ची आज हमारे बीच में होती, यह कहना है भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी शर्मा का जोकि परिवार से दुख सांझा करने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे ।शर्मा ने आगे कहा कि यह कैसी पुलिस है? किस प्रकार की सुरक्षा यह देंगे? और अगले ही दिन उसी घर से बच्ची की लाश बरामद होती है। बच्ची नग्न अवस्था में दो घंटे बाद अस्पताल पहुंचाई गई। पता नहीं उनकी बेटी को क्या-क्या झेलना पड़ा। वह भी किसी की बहन थी, किसी की बेटी थी। पंजाब पुलिस को ज़रा भी लज्जा नहीं आई? जहां महिला पुलिस आनी चाहिए थी, वहां महिला पुलिस को न भेजना संवेदनहीनता नहीं तो और क्या है? क्या CP (कमिश्नर) को थोड़ी-सी भी संवेदना नहीं होनी चाहिए थी? उनका मौके पर न पहुंचना और चार दिन बाद आना—इससे ज़्यादा शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता।शर्मा ने भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील शर्मा, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य मनोरंजन कालिया, प्रदेश महामंत्री राकेश राठौर, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष केडी भंडारी,पूर्व विधायक शीतल अंगुराल,वरिष्ठ भाजपा नेत्री करमजीत कौर,जिला महामंत्री अशोक सरीन हिक्की,जिला उपाध्यक्ष अश्वनी भंडारी,दविंदर भारद्वाज,प्रमोद कश्यप,पूर्व प्रदेश सचिव अनिल सच्चर,पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष रमेश शर्मा,रमन पब्बी,मंडल अध्यक्ष मनीष बल,कुणाल शर्मा,सन्नी शर्मा,आदि उपस्थित में आगे कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है। उन्होंने क्रमवार बताते हुए कहा कि एक महीने में 13 बलात्कार हुए हैं—लुधियाना, फाजिल्का और पटियाला, आदि में।शर्मा ने कहा कि जिस तरह गैंग और गैंगस्टर बेखौफ़ घूम रहे हैं, उस तरह पंजाब की बेटियाँ और बहनें सुरक्षित नहीं हैं। कोई दिन, कोई हफ़्ता ऐसा नहीं जाता जब यह खबर न आए कि किसी बच्ची से बलात्कार हुआ। लगता है यह सरकार अराजक तत्वों के सामने हथियार डाल चुकी है। पंजाब में क़ानून का राज नहीं रह गया और परिवारों को भी पुलिस पर भरोसा नहीं रहा।परिवार पर दबाव डालकर, पुलिस को बचाने की कोशिश करना—क्या यह सही है? उन चार पुलिसकर्मियों को निलंबित या बर्खास्त क्यों नहीं किया गया? उस माँ और नानी की हालत देखकर तो किसी का भी दिल पसीज जाए—एक साल पहले पति खोया, अब बेटी खो दी।शर्मा ने आगे कहा कि आज पूरा जालंधर और पूरा पंजाब इस बच्ची के साथ हुई घटना को लेकर दुखी है। मेरी अपील है कि CP को जागना चाहिए—अपने अंदर की ममता को जगाना चाहिए कि “मैं भी किसी की बेटी हूँ, किसी की माँ हूँ।” जब महिला स्वयं नेतृत्व में होते हुए दूसरी महिलाओं के दर्द को नहीं समझती, तो यह और भी शर्मनाक बन जाता है—बच्ची नग्न अवस्था में पड़ी रही और वहाँ कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी—इससे बड़ी शर्म की बात सरकार के लिए नहीं हो सकती।शर्मा ने आखिर में कहा की मुझे लगता है कि आज उनके घर अंतिम संस्कार की शुरुआत है, कल पाठ हो जाएगा। अगर पुलिस पर कार्रवाई नहीं होती, तो पूरा समाज परिवार के साथ खड़ा रहेगा। और जब तक इस परिवार को इंसाफ़ नहीं मिलता, संघर्ष भी करना पड़े—तो हम संघर्ष के लिए भी तैयार हैं।

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